अधिकार क्या है?

अधिकार क्या है? अधिकार किसी व्यक्ति का अपने लोगों अपने समाज और अपनी सरकार से वादा है हम सभी खुशी से बिना डर भय के और अपमानजनक व्यवहार से बचकर जीना चाहते हैं इसके लिए हम दूसरों से ऐसा व्यवहार की अपेक्षा करते हैं। जिससे हमें कोई नुकसान ना हो कोई कष्ट ना हो इसी प्रकार हमारे व्यवहार से किसी से भी किसी को नुकसान नहीं होना चाहिए। कोई कष्ट नहीं होना चाहिए इसलिए अधिकार तभी संभव है जब आपका अपने बारे में किया हुआ वादा दूसरे पर भी समान रूप से लागू हो आप ऐसे अधिकार नहीं रख सकते जो दूसरों को कष्ट दे या नुकसान पहुंचा है।

आप इस तरह क्रिकेट खेलने के अधिकार का दावा नहीं कर सकते कि पड़ोसी की खिड़की के शीशे टूट जाएं और आपके अधिकार को कुछ ना हो युगोस्लाविया के सब लोग पूरे देश पर सिर्फ अपना दावा नहीं कर सकते थे सो हम जो दावे करते हैं वह तार्किक भी होने चाहिए। वह ऐसे होने चाहिए कि हर किसी को समान मात्रा में उन्हें दे पाना संभव हो इस प्रकार हमें कोई भी अधिकार इस बाध्यता के साथ मिलता है कि हम दूसरों के अधिकारों का आदर करें हम कुछ दावे कर दें सिर्फ इतने भर से वह हमारा अधिकार नहीं हो जाता।

इससे उस पूरे समाज से भी स्वीकृति मिलनी चाहिए जिसमें हम रहते हैं हर समाज अपने आचरण को व्यवस्थित करने के लिए कुछ कायदे कानून बनाता है। यह कायदे कानून हमें बताते हैं कि क्या सही है और क्या गलत है समाज जिस चीज को सही मानता है सब के अधिकार लायक मानता है वही हमारे भी अधिकार होते हैं। इसलिए समय और स्थान के हिसाब से अधिकारों की अवधारणा भी बदलती रहती है 200 साल पहले अगर कोई कहता की औरतों को भी वोट देने का अधिकार होना चाहिए तो उसे अजीब माना जाता आज सऊदी अरब में उनको वोट का अधिकार ना होना ही अजीब लगता है। लेकिन अभी ताजा खबरें यह है कि सऊदी अरब में भी महिलाओं को वोट देने का अधिकार दे दिया गया है, जब समाज में मानने कायदों को लिखित पड़ोस में ला दिया जाता है तो उसको असली ताकत मिलती है इसके बिना वे प्राकृतिक या नैतिक अधिकार ही रह जाते हैं।

अधिकारों के बारे में और बात करें तो अगर अन्य नागरिक यह सरकार इन अधिकारों का आदर नहीं करते इनका उल्लंघन करते हैं तो हम इसे अपने अधिकारों का हनन कहते हैं। ऐसी परिस्थिति में कोई भी नागरिक अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है अपने लिए न्याय की मांग कर सकता है अपने अधिकारों की रक्षा की मांग कर सकता है। इसलिए हम अगर किसी दावे को अधिकार कहते हैं तो उन्हें यह तीन बुनियादी चीज होनी चाहिए अधिकार लोगों के तार्किक दावे हैं उन्हें समाज से स्वीकृति और अदालतों द्वारा मान्यता प्राप्त होनी चाहिए।

इस लेख में हमने जाना कि अधिकार क्या है अधिकारों के बारे में और अधिक जानने के लिए आप नीचे कुछ आर्टिकल दिए गए हैं उन्हें भी पढ़ सकते हैं। हमने आगे आर्टिकल में वर्णित किया है कि, लोकतंत्र में अधिकारों की क्या जरूरत है?, भारतीय संविधान में अधिकार, समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के खिलाफ अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार ,और आगे हम यह जानेंगे कि हमें यह अधिकार कैसे मिल सकते हैं।

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