स्वतंत्रता का अधिकार | right to freedom in hindi

स्वतंत्रता का अधिकार

स्वतंत्रता का मतलब बाधाओं का ना होना है व्यवहारिक जीवन में इसका मतलब होता है हमारे मामलों में किसी किस्म का दखल ना होना ना सरकार का ना व्यक्तियों का। हम समाज में रहना चाहते हैं लेकिन हम स्वतंत्रता भी चाहते हैं, हम मनचाहे ढंग से काम करना चाहते हैं कोई हमें यह आदेश ना दे कि इसे ऐसे करो वैसे करो। इसलिए भारतीय संविधान में प्रत्येक नागरिक को कई तरह की स्वतंत्रता दी हैं जो इस प्रकार हैं।

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  • शांतिपूर्ण ढंग से जमा होने की स्वतंत्रता
  • संगठन और संघ बनाने की स्वतंत्रता
  • देश में कहीं भी आने-जाने की स्वतंत्रता
  • देश के किसी भी भाग में रहने बसने की स्वतंत्रता और कोई भी काम करने धंधा चुनने या पैसा करने की स्वतंत्रता आदि।

याद रखिए कि हर नागरिक को यह स्वतंत्रता प्राप्त है इसका मतलब यह हुआ कि आप अपनी स्वतंत्रता का ऐसा उपयोग नहीं कर सकते जिससे दूसरों की स्वतंत्रता का हनन होता हो। आप की स्वतंत्रता सार्वजनिक परेशानी या अव्यवस्था पैदा नहीं कर सकती आप वह सब करने के लिए आजाद हैं जिससे दूसरों को परेशानी ना हो। स्वतंत्रता का मतलब असीमित मनमानी करने का लाइसेंस पा लेना नहीं है, इसी कारण समाज के व्यापक हितों को देखते हुए सरकार हमारी स्वतंत्रता ऊपर कुछ किस्म की पाबंदियां लगा सकती है।

अभिव्यक्ति की आजादी हमारे लोकतंत्र की एक बुनियादी विशेषता है। अभिव्यक्ति की आजादी मैं बोलने लिखने और कला के विभिन्न रूपों में स्वयं को व्यक्त करना शामिल है दूसरों से स्वतंत्र ढंग से विचार-विमर्श और संवाद करके ही हमारे विचारों और व्यक्तित्व का विकास होता है। आपकी राय दूसरों से अलग हो सकते हैं संभव है कि कई सौ लोग एक ही तरह से सोचते हो तब भी आपको अलग राय रखने और व्यक्त करने की आजादी है।

आप सरकार की किसी नीति से यह किसी संगठन की गतिविधियों से असहमति रख सकते हैं अपने मां-बाप दोस्तों या रिश्तेदारों से बातचीत करते हुए आप सरकार की किसी नीति या किसी संगठन की गतिविधियों की आलोचना करने को स्वतंत्र हैं। आप अपने विचारों को पर्चा छुपाकर या अखबारों पत्रिकाओं में लेख लिखकर भी व्यक्त कर सकते हैं।

आप यह काम चित्र बनाकर कविता या गीत लिखकर भी कर सकते हैं। पर आप इस स्वतंत्रता का उपयोग करके किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ हिंसा को नहीं भड़का सकते, आप इस स्वतंत्रता का उपयोग करके लोगों को सरकार के खिलाफ बगावत के लिए नहीं उठा सकते, आप किसी के खिलाफ झूठी बातें कहने या उसकी प्रतिष्ठा गिराने वाली बातें प्रचारित करने में इस स्वतंत्रता का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

शांतिपूर्ण ढंग से जमा होने की स्वतंत्रता है नागरिकों को किसी मुद्दे पर जमा होने बैठक करने प्रदर्शन करने जुलूस निकालने का अधिकार है वह यह सब किसी समस्या पर चर्चा करने विचारों का आदान प्रदान करने किसी उद्देश्य के लिए जनमत तैयार करने या किसी चुनाव में किसी उम्मीदवार या पार्टी के लिए वोट मांगने के लिए कर सकते हैं।

पर ऐसी बैठक के शांतिपूर्ण होने चाहिए इससे सार्वजनिक व्यवस्था या समाज में अशांति नहीं फैलने चाहिए इन बैठकों और गतिविधियों में भाग लेने वाले को अपने पास हथियार नहीं रखनी चाहिए नागरिकों को संगठन बनाने में भी स्वतंत्रता है जैसे किसी कारखाने के मजदूर अपने हितों की रक्षा के लिए मजदूर संघ बना सकते हैं किसी शहर के कुछ लोग भ्रष्टाचार या प्रदूषण के खिलाफ अभियान चलाने के लिए संगठन बना सकते हैं।

किसी भी नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में जाने की स्वतंत्रता किसी भी नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में जाने की स्वतंत्रता है। हम भारत के किसी भी हिस्से में रहे और बस सकते हैं जैसे असम का कोई व्यक्ति हैदराबाद में व्यवसाय करना चाहता है। संभव है कि उससे नहीं उस शहर को देखा भी ना हो या यह उसका कोई संपर्क ना हो फिर भी भारत का नागरिक होने के कारण उसे ऐसा करने का अधिकार है।

किसी अधिकार के चलते लाखों लोग गांव से निकलकर शहरों की ओर देश के गरीब इलाकों से निकलकर समृद्धि लाखों में आकर काम करते हैं बस जाते हैं पेशा चुनने के मामले में भी ऐसी ही स्वतंत्रता प्राप्त है, आपको कोई भी यह आदेश नहीं दे सकता कि आप सिर्फ यह काम करें या वह महिलाओं से यह नहीं कहा जा सकता कि फला काम उनके लिए नहीं है।

पिछड़ी और कमजोर जातियों के लोगों से नहीं कहा जा सकता है कि वह अपने परंपरागत देशों में ही रहे संविधान कहता है कि किसी भी व्यक्ति को उनके जीने का अधिकार और निजी स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता। कानून द्वारा स्थापित व्यवस्थाओं को छोड़कर इसका मतलब यह है कि जब तक अदालत किसी व्यक्ति को मौत की सजा सजा नहीं सुनाती उसे मारा नहीं जा सकता।

इसका यह भी मतलब है कि कानूनी अधिकार होने पर ही सरकार या पुलिस अधिकारी किसी नागरिक को गिरफ्तार कर सकता है। अगर वह ऐसा करते हैं जब भी उन्हें कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। गिरफ्तारी या हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी और हिरासत में लेने के कारणों की जानकारी देनी होती है। गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए व्यक्ति को सबसे निकट ग्रह मजिस्ट्रेट के सामने गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर प्रस्तुत करना होता है। ऐसे व्यक्ति को वकील से विचार-विमर्श करने और अपने बचाव के लिए वकील रखने का अधिकार है।

यही हमारे संविधान में नागरिकों के लिए स्वतंत्रता का अधिकार का वर्णन है

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